• यह भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद क्या बला है?

    Author(s):
    Pramod Ranjan (see profile)
    Date:
    2023
    Group(s):
    Academic Politics, Communication Studies, Curriculum Development
    Subject(s):
    Academic freedom, Freedom of expression
    Item Type:
    Online publication
    Tag(s):
    Whatsapp group, Hindi professors, Hindi professors, NDA goverment, Modi goverment
    Permanent URL:
    https://doi.org/10.17613/8gdp-eg66
    Abstract:
    भारत में फासीवादी नीतियों का नौकरीपेशा मध्यम वर्ग प्रतिरोध नहीं कर रहा। हालांकि, प्रतिरोध की अधिक जिम्मेवारी उन प्राध्यापकों पर है, जो स्वयं को बुद्धिजीवी कहते हैं और जिन्हें लिखने और बोलने के लिए किंचित अधिक नैतिक और कानूनी सुविधा प्राप्त है। सच यह है कि इनमें से अधिकांश भय से अधिक लोभ के कारण चुप हैं और चुपचाप निजाम बदलने का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन उनकी यह चुप्पी उस भय से कई गुणा अधिक खौफनाक साबित हो सकती है, जिसे वे अभी झेल रहे हैं।
    Notes:
    यह लेख स्वतंत्र प्रभात नामक वेबसाइट पर 9 जून, 2023 को प्रकाशित हुआ था।
    Metadata:
    Published as:
    Online publication    
    Status:
    Published
    Last Updated:
    9 months ago
    License:
    Attribution

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    Item Name: pdf yah-bhartiye-pradhyapak-parishad-kya-bala-hai_pramod-ranjan_2023.pdf
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