• हिस्सेदारी और विश्वसनीयता का समाजशास्त्र

    Author(s):
    Pramod Ranjan (see profile)
    Date:
    2011
    Group(s):
    Communication Studies
    Subject(s):
    Journalism--Objectivity, Journalism and social justice, Indian press, Minorities in journalism, Hindi language, Caste, Dalits
    Item Type:
    Article
    Tag(s):
    Hindi Patrkarita, Jati, Dalit-OBC, bahujan
    Permanent URL:
    https://doi.org/10.17613/n1cf-3z80
    Abstract:
    पत्रकारिता में बहुत कुछ बदला है। कारोबार के आकार से लेकर टेक्नोलॉजी तक में बुनियादी बदलाव हो चुके हैं। लेकिन पत्रकारिता में एक चीज है जो समय के फ्रेम में लगभग फ्रीज सी हो गई है। यह ठहराव पत्रकारिता में जातिवाद के संदर्भ में है। पत्रकारिता में वंचित समूहों की हिस्सेदारी पहले बिल्कुल नहीं थी और अब भी हालात बदले नहीं हैं। प्रमोद रंजन का यह आलेख हिंदी पत्रकारिता के इसी ठहराव को रेखांकित करता है।
    Notes:
    यह आलेख कथादेश की मीडिया वार्षिकी (अप्रैल, 2011 में प्रकाशित हुआ था। इससे संबंधित और विस्तार से इन लिंकों पर देखा जा सकता है : 1. https://doi.org/10.17613/7bf4-3p41 2.https://doi.org/10.17613/zdpe-2k79
    Metadata:
    Published as:
    Journal article    
    Status:
    Published
    Last Updated:
    10 months ago
    License:
    Attribution

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    Item Name: pdf hissedari-aur-vishwashniyata-ka-samajshashtr_a_pramod-ranjan.pdf
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