• राणा बैनर्जी: नया नहीं इस जीवन में मरना

    Author(s):
    Pramod Ranjan (see profile)
    Date:
    2023
    Group(s):
    General Education, Philosophy of Religion, Sociology
    Subject(s):
    Caste-based discrimination, Social justice, India--Patna, India--Bihar, Literature and society, Hinduism--Customs and practices, Hinduism and politics, Culture conflict
    Item Type:
    Article
    Tag(s):
    Ranjan Pramod 1980-, Raana banerjee
    Permanent URL:
    https://doi.org/10.17613/w0z2-kb50
    Abstract:
    प्रमोद रंजन इस लेख के माध्यम से सामाजिक कार्यकर्ता राणा बैनर्जी के बहुमुखी प्रतिभा को सामने लाते हैं। पटना के संस्कृतिकर्मी राणा बैनर्जी ने वर्ष 2008 में गंगा में कूदकर आत्महत्या कर लिया था। जब कवि और लेखक आत्महत्या करने लगे तो यह समझ लेना चाहिए कि देश पर, समाज पर गहरा संकट आनेवाला है। आत्महत्या स्वजनित नहीं होती अपितु परिस्थितिजन्य होती है। रंजन यह बताते है कि बेईमान आदमी कभी आत्महत्या नहीं कर सकता।
    Notes:
    यह लेख हंस पत्रिका के अप्रैल, 2008 के अंक में छपा है।
    Metadata:
    Published as:
    Journal article    
    Status:
    Published
    Last Updated:
    1 year ago
    License:
    Attribution-NonCommercial

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