• बिहारी अस्मिता: शहीद बनाने का खेल

    Author(s):
    Pramod Ranjan (see profile)
    Date:
    2009
    Group(s):
    Cultural Studies, General Education, Sociology
    Subject(s):
    Socialism, Democracy, Social justice, India--Bihar, India--Maharashtra, Rural-urban migration, Peasants, Yadav, Laloo Prasad, Nītiśa Kumāra, 1951-
    Item Type:
    Article
    Tag(s):
    Migration of People, Caste, Bhumihar, Bihari Asmita, Bihari Asmita, raj thackeray
    Permanent URL:
    https://doi.org/10.17613/ywf9-ee68
    Abstract:
    27 अक्टूबर, 2008 को एक बिहारी नवयुवक राहुल राज की मुंबई पुलिस ने हत्या कर दी थी। इसके बाद बिहार में युवाओं ने व्यापक आंदोलन किया था। कई जगहों पर तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुईं थीं। कई दिनों तक राजधानी पटना ठप रही थी। इस संबंध में आरोप-प्रत्यारोप की लंबी राजनीति चली थी और राहुल राज को बिहारी अस्मिता के प्रतीक के रूप में देखा गया था। इस पूरे प्रसंग से राहुल राज की जाति का भी गहरा संबंध था। प्रमोद रंजन का यह लेख इस घटना के अनेक अनदेखे पहलुओं को सामने लाता है।
    Notes:
    यह लेख समयांतर पत्रिका के मार्च, 2009 अंक में प्रकाशित हुआ था।
    Metadata:
    Published as:
    Journal article    
    Status:
    Published
    Last Updated:
    1 year ago
    License:
    Attribution-NonCommercial

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