• प्रभाष जोशी को याद करते हुए

    Author(s):
    Pramod Ranjan (see profile)
    Date:
    2010
    Group(s):
    Communication Studies, Scholarly Communication, Sociology
    Subject(s):
    Journalism--Objectivity, Journalism and social justice, Indian press, Journalistic ethics, Caste, Journalists, Authors, Hindi, Race in mass media, Mass media, Brahmanism
    Item Type:
    Book chapter
    Tag(s):
    Prabhash Joshi, Jansatta, Jansatta, cricket, Journalist in Hindi
    Permanent URL:
    https://doi.org/10.17613/5xnz-q009
    Abstract:
    प्रभाष जोशी की बौद्धिकता आजीवन अंतत: किसके पक्ष में रही? एक आदमी जो अन्यत्र किंचित तार्किक था, क्यों सामाजिक समानता का आग्रही नहीं बन सका? वर्ण-व्यवस्था का समर्थन कर उन्होंने गांधीवाद का विकास किया उसकी अवैज्ञानिकता को ही प्रमाणित किया? भारतीय प्रभुवर्ग की गुलामी उन्होंने क्यों स्वीकार की? सिर्फ इसलिए कि वह इन्हीं के बीच पैदा हुए थे? इस संस्मरण की पृष्ठभूमि को समझने के लिए निम्नांकित लेख भी देखे जाने चाहिए। 1. दैनिक जनसत्ता के 30 अगस्त, 2009 अंक में प्रकाशित प्रमोद रंजन का लेख “विश्वास का धंधा’:https://doi.org/10.17613/07bd-cq52/ 2.दैनिक जनसत्ता में 6 सितंबर, 2009 को प्रकाशित प्रभाष जोशी का लेख “काले धंधे के रक्षक”:https://doi.org/10.5281/zenodo.7387770 3.हाशिया नामक ब्लॉग पर सितंबर, 2009 में प्रकाशित प्रमोद रंजन का लेख: “महज एक बच्चे की ताली पर”:https://hcommons.org/deposits/item/hc:49883/ 4.प्रमोद रंजन की पुस्तिका: “मीडिया में हिस्सेदारी”: https://doi.org/10.17613/7bf4-3p41
    Notes:
    यह संस्मरण प्रभाष जोशी (15 जुलाई 1937 – 5 नवंबर 2009) के निधन के बाद मोहल्ला ब्लॉग पर प्रकाशित हुआ था। यह प्रभाष जोशी पर केंद्रित पुस्तक ‘प्रभाष जोशी: याद, संवाद, विवाद और प्रतिवाद' (संपादक आलोक तोमर/कृपाशंकर) में भी संकलित है। यह पुस्तक वर्ष 2010 में शिल्पायन प्रकाशन दिल्ली से प्रकाशित हुई थी।
    Metadata:
    Published as:
    Book chapter    
    Status:
    Published
    Last Updated:
    1 year ago
    License:
    Attribution

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