• 'हिंदी साहित्येतिहास का बहुजन पक्ष', 'बहुजन साहित्य की प्रस्तावन' व 'महिषासुर एक जननायक': नई सांस्कृतिक-साहित्यिक दृष्टि की प्रस्तावना

    Author(s):
    Dr Siddharth
    Contributor(s):
    Pramod Ranjan (see profile)
    Date:
    2022
    Group(s):
    Book Reviewing, Cultural Studies, Festivals, Rituals, Public Spectacles, and Popular Culture, Literary Journalism, Literary theory
    Subject(s):
    Caste, Hindi literature, Book reviews, Dalits in literature, Literature and society, Criticism, Caste in literature, Literary movements, Indian mythology, Indigenous peoples--Social life and customs
    Item Type:
    Book review
    Tag(s):
    Social justice--India, Hindi literature--History and criticism, Durgā (Hindu deity), Martyrdom in literature, Bahujan Sahitya, Bahujan literature, Dalit literature, OBC literature
    Permanent URL:
    https://doi.org/10.17613/jwg6-s007
    Abstract:
    बहुजन साहित्य और संस्कृति की अवधारणा ने पिछले कुछ वर्षों में आकार लेना शुरू किया है। अभी हाल (2016) में आए प्रमोद रंजन द्वारा संपादित तीन संकलन- ‘बहुजन साहित्य की प्रस्तावना’, ‘हिन्दी साहित्येतिहास का बहुजन पक्ष’और ‘महिषासुर एक जननायक’- बहुजन साहित्यिक-सांस्कृतिक आंदोलन की प्रस्तावना और अवधारणा को सामने रखते हैं और इसे पल्लवित-पुष्पित तथा विकसित करने का पुरजोर आग्रह करते हैं तथा इसे भारत के बहुसंख्यक समाज के बेहतर भविष्य हेतु अपरिहार्य और अनिवार्य मानते हैं। क्या है बहुजन साहित्य, भारतीय समाज के किस तबके का यह प्रतिनिधित्व करता है? किस संस्कृति-साहित्य, मूल्य व्यवस्था, संस्कार, परंपरा और समाज व्यवस्था की यह मुखालफत करता है और इसके बरक्स किन चीजों की स्थापना करना चाहता है तथा इसकी वैचारिकी क्या है? और अतीत में किन परंपराओं से यह अपना नाता जोड़ना चाहता है और किसे खारिज करता है? इन प्रश्नों के उत्तर देने की कोशिश ये संकलन करते हैं। सिद्धार्थ का विश्लेषण :
    Notes:
    यह लेख फारवर्ड प्रेस की वेबसाइट पर भी 8 नवंबर, 2018 हिंदी व अंग्रेजी में प्रकाशित हुआ था। हिंदी लेख यहां देखें (बहुजन साहित्य : एक नई सांस्कृतिक-साहित्यिक दृष्टि की प्रस्तावना): https://www.forwardpress.in/2018/11/bahujan-sahitay-ek-nai-sanskritik-sahityik-drishti-ki-prastavana/ अंग्रेजी लेख यहां देखें (Bahujan literature: Introduction to a new literary-cultural vision): https://www.forwardpress.in/2018/11/bahujan-sahity-ek-nai-sanskritik-sahityik-drishti-ki-prastavana/
    Metadata:
    Status:
    Published
    Last Updated:
    2 weeks ago
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    Attribution

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