• शिमला डायरी: पीछे छूट गई धूल को समेट लाया कौन खानाबदोश

    Author(s):
    प्रमोद कौंसवाल
    Contributor(s):
    Pramod Ranjan (see profile)
    Date:
    2020
    Group(s):
    Book Reviewing, Literary Journalism
    Subject(s):
    Journalism, Indian press, Hindi literature, Reportage literature, Hindi, India--Himachal Pradesh, India--Simla
    Item Type:
    Book review
    Tag(s):
    Book reviews, Magazine editors, Literary criticism, Ranjan, Pramod
    Permanent URL:
    https://doi.org/10.17613/29gd-0e22
    Abstract:
    शिमला डायरी’ अपने समय और समाज की एक ऐसी साहित्यिक-सांस्कृतिक डायरी और दस्तावेज है, जिसका एक अहम हिस्सा हिंदी पत्रकारिता की दुनिया है। इसका विहंगम अवलोकन किया है चर्चित कवि और पत्रकार प्रमोद कौंसवाल ने, जिन्होंने काफी समय तक चंडीगढ़ में रहते हुए खुद शिमला, चंडीगढ़ और पंजाब की पत्रकारिता की दुनिया को बहुत करीब से देखा है। यह किताब की सिर्फ एक समीक्षा नहीं है, बल्कि उस काल खंड की पत्रकारिता व चंडीगढ़-हिमाचल की साहित्यिक-सांस्कृतिक दुनिया का एक संक्षिप्त, रोचक संस्मरण भी है।
    Notes:
    प्रमोद रंजन की हिमाचल के संस्मरणों पर केंद्रित पुस्तक 'शिमला डायरी' 2019 में प्रकाशित हुई थी।
    Metadata:
    Published as:
    Online publication    
    Status:
    Published
    Last Updated:
    4 months ago
    License:
    Attribution

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